बरेली, 8 मार्च 2025. महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली के छात्र के तौर पर उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव-2025 में हिस्सा लेना जीवन में कभी भी न भूलनेवाला खुशनुमा अनुभव बन गया। अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव-2025 का आयोजन एक से 7 मार्च 2025 तक था।
आदरणीय विभागाध्यक्ष डॉ.ए.के सिंह की प्रेरणा से योग के स.आचार्य डॉक्टर सेतवान के नेतृत्व विश्वविद्यालय के योग विभाग के छात्र-छात्राओं का दल 28 फरवरी की शाम को ऋषिकेश पहुंचा। उस दिन मौसम काफी खुशनुमा था। रिमझिम फुहारें पड़ रही थीं और इस मौसम की वजह से जहां ठंड पहले की तुलना में बढ़ गई थी वहीं प्रकृति का सौन्दर्य भी कई गुना बढ़ गया था। ऋषिकेश पहुंचते ही रेलवे स्टेशन पर पहाड़ों की तलहटी में बसे ऋषिकेश शहर के प्राकृतिक सौन्दर्य को देखकर हम सभी देवभूमि में पहुंचने के सुख को अनुभव कर पा रहे थे।
अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव-2025 का आयोजन उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल विकास निगम की तरफ से किया गया था। कार्यक्रम स्थल सदानीरा पवित्र गंगा के तीरे गंगा रिसॉर्ड था। हम लोगों के रहने की व्यवस्था यहां हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा में किया गया था और भोजन की व्यवस्था गंगा किनारे ही स्वामीनारायण आश्रम में किया गया था। इस वजह से धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ हमें स्वत: ही मिल रहा था।
प्रथम दिन 1 मार्च 2025
अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव-2025 का उद्घाटन एक मार्च 2025 को उत्तराखंड के वनमंत्री सुबोध उनियाल, परमार्थ निकेतन आश्रम के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती, देव संस्कृति विवि के कुलपति डॉ चिन्मय पंड्या और योगाचार्य उषा देवी ने संयुक्त रूप से किया। इस दौरान स्वामी चिदानंद महाराज ने कहा कि कोविड के दौरान लोगों ने योग के महत्व को समझा। जो काम दवाइयां नहीं कर पाईं उसे योग और प्राणायाम ने कर दिया। हम यौगिक जीवन से स्वयं को बदल सकते हैं। कहा कि योग सबके साथ खड़े होने का संकल्प है।
दोपहर तीन बजे से शाम 5.30 बजे तक अक्षर योग केंद्र के ग्रैंड मास्टर अक्षर ने योग और आध्यात्म पर अपने विचार रखे। योग गुरु अक्षर ने बताया कि लगातार यह सुनते हुए कि ‘शरीर माया है’, लोगों में ऐसी ही भावना बन गई है जबकि ऐसा नहीं है। शरीर माया नहीं है। आत्मा इसी शरीर के अंदर रहती है, शरीर कष्ट में है तो आत्मा प्रसन्न कैसे रह सकेगी। इसीलिए शरीर की साधना भी जरूरी है। शरीर को स्वस्थ और मजबूत रखना जरूरी है।
शाम को स्वामीनारायण आश्रम की तरफ से भव्य गंगा आरती का आयोजन हुआ। इसमें देश भर के विश्वविद्यालयों से आए छात्र-छात्राओं और योग प्रेमियों ने भागीदारी की। मां गंगा की आरती उतारी और पुण्य का लाभ लिया।
पहले दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत रात 8 बजे से सूफी गायिका ज्योति नूरन ने सूफी गीतों की प्रस्तुति दी जिसका वहां उपस्थित जनसमुदाय ने भरपूर आनंद उठाया।
दूसरा दिन 2 मार्च 2025
दिन की शुरुआत मां गंगा के दर्शन से हुई। इसके उपरांत सुबह 6 बजे योगिनी भाग्यश्री जोशी के ध्यान कार्यक्रम में प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने ध्यान करने की विधि का विस्तार से समझाया और ध्यान का व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया।
इसके बाद अक्षर योग केंद्र के ग्रैंड मास्टर अक्षर ने योगाभ्यास कराया। कहा कि योग जीवन के लिए आवश्यक है, इससे मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की विकृतियों को दूर किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि मन की एकाग्रता और अपनी स्थिति बेहतर करने के लिए सभी को ध्यान करना चाहिए।
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के डॉ.लक्ष्मी नारायण जोशी ने नाड़ी विज्ञान पर प्रकाश डाला। बताया कि नाड़ी विज्ञान चिकित्सा ऐसी प्राचीन विद्या है जिससे किसी भी प्रकार के दर्द को कुछ मिनटों में ही दूर किया जा सकता है। उन्होंने बताया शरीर में 72 हजार नाड़ियां हैं और उनको सक्रिय करके ढेरों शारीरिक समस्याओं का निदान किया जा सकता है।
तीसरा दिन 3 मार्च 2025
गंगा दर्शन के उपरांत तीसरे दिन की शुरुआत भी सुबह 6 बजे भाग्यश्री जोशी जी द्वारा कराई गई ध्यान साधना के साथ हुई।
सुबह सात बजे से 9 बजे तक अंतरष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिप्राप्त योग ट्रेनर उषा देवी ने योग अभ्यास कराए। पद्म विभूषण बीकेएस अयंगर से प्रशिक्षण प्राप्त उषा देवी अयंगर योग की ट्रेनर हैं। उषा देवी एक स्विस नागरिक हैं जो भारतीय योग विद्या के प्रभाव में भारत की ही होकर रह गईं और ऋषिकेश में रहकर योग प्रशिक्षण करती हैं। उन्होंने बताया कि योग करते समय शरीर के एलाइनमेंट या अभ्यास के दौरान शरीर की सही स्थिति का होना अनिवार्य शर्त है। इसके बिना योग के लाभ नहीं मिल सकते। उन्होंने अयंगर योग शैली के अनुसार सूर्य नमस्कार कराया।
तीसरे दिन ही प्राणिक निद्रा पर डॉ. उर्मिला पांडेय का सत्र हुआ। उन्होंने जानकारी दी कि कॉस्मिक एनर्जी के माध्यम से भी रोगों का निदान किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अभ्यास के जरिए ब्रह्मांड की ऊर्जा को शरीर के उन अंगों तक प्रवाहित किया जा सकता है जहां किसी कारणवश ऊर्जा की कमी हो गई है और उन अंगों ने अपना कार्य सुचारू रूप से करना बंद कर दिया है। उन्होंने बताया कि हर व्यक्ति का एक आभामंडल होता है जो करीब एक मीटर तक का हो सकता है। यह आभामंडल सकारात्मक और नकारात्मक हो सकता है और इसी आधार पर हमें कुछ लोगों के करीब बैठना अच्छा और किसी के साथ बैठना अप्रिय लगता है।
चौथा दिन-4 मार्च 2025
दिन की शुरुआत प्रात: 6 बजे देश भर से आए साथियों के साथ योगाभ्यास के साथ हुई। इसके उपरांत 7 बजे योगिनी उषा देवी ने ताड़ासन, त्रिकोण आसन, वीरासन आदि का अभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि इन अभ्यासों के दौरान घुटनों को मुड़ना नहीं चाहिए और ना ही अनावश्यक दबाव पड़ना चाहिए। उन्होंने बताया कि योगासन के समय युवाओं में ऊर्जा दिखाई देनी चाहिए। अधिक उम्र के लोगों को सावधानी के साथ बिना जबर्दस्ती किए आसन करने चाहिए।
आयुर्वेदाचार्य डॉ. नरेश चौधरी ने योग में अष्टांग योग ऐसा साधन है जो आपको हमेशा स्वस्थ रखेगा। अपनी लाइफ स्टाइल ठीक रखें, डाइट सही रखें यानी खान-पान शुद्ध, सात्विक और पौष्टिक हो और योग करें तो आप हमेशा स्वस्थ और प्रसन्न रह सकते हैं। योगी अमृतराज ने बताया कि अधिकतर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण गलत खान-पान है। इसकी वजह से कैंसर जैसी बीमारियां लोगों का जीवन नष्ट कर रही हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को एल्युमीनियम के बर्तनों से दूरी बना लेनी चाहिए। इनकी जगग मिट्टी और तांबे के बर्तन स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं।
दोपहर तीन बजे से कथावाचक जयाकिशोरी योग महोत्सव में आए साधकों से रूबरू हुईं। उन्होंने बताया कि दुनिया में कोई भी बात नई नहीं है, उनको बताने का या प्रस्तुत करने का तरीका जरूर नया हो सकता है। गुरु उस ज्ञान पर पड़ी धूल को हटाने का काम करता है। बात केवल इतनी सी है कि जो जल्दी समझ जाता है वह दूसरों को समझने में मदद करे।
देर शाम को इंदर आर्य का सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ जिसमें उनके गाए हुए लोकगीतों पर वहां मौजूद जनमानस खूब झूमे।
पांचवां दिन 5 मार्च 2025
दिन की शुरूआत सुबह 6 बजे योगी कमल सिंह जी के साथ योगाभ्यास से हुई। उन्होंने मैसूर स्टाइल योग के अनुसार अष्टांग योग, सूर्य नमस्कार ए और सूर्य नमस्कार बी का अभ्यास कराया। इसके साथ ही वीरभद्रासन, त्रिकोणासन जैसे अभ्यास कराए। उन्होंने बताया कि आसनों का अभ्यास करते समय स्वसन और शरीर की सही स्थिति का ध्यान रखना आवश्यक है क्योंकि कोई चीज अगर लाभ पहुंचा सकती है तो गलत तरीके से किए जाने पर उसके नुकसान भी हो सकते हैं।
आगे के सत्र में योगी कपिल संघी ने बताया कि मन की गति कुछ और होती है और प्रकृति की गति कुछ और ही होती है। अपनी और प्रकृति की गति के बीच तालमेल बैठा सकें तभी जीवन में आगे बढ़ा जा सकता है।
दोपहर के सत्र में ओशो ध्यान केंद्र के स्वामी बोधि वर्तमान ने ओशो के संदेशों को समझाया। इसके साथ ही हंसने का महत्व बताते हुए कहा कि सिर्फ हंसने और खुश रहने से ही हम कई सारी शारीरिक और मानसिक बीमारियों से दूर रह सकते हैं। कहा कि खुश रहने, हंसने को अपनी आदतों में शामिल हों, शुरूआत बेवजह हंसने से भी हो सकती है। ओशो ध्यान केंद्र के सदस्यों ने खुद मुंह और आंखों से अलग-अलग हास्य मुद्राएं बना कर लोगों को हंसाया।
शाम को गंगा आरती में भाग लिया। इसके उपरांत सांस्कृतिक कार्यक्रम में लोक गायक विमल बावरा ने लोकगीतों की प्रस्तुति दी जिसका सभी ने भरपूर आनंद उठाया।
छठा दिन, 6 मार्च 2025
सुबह 6 बजे का पहला सत्र एक बार पुन: योगी कमल सिंह के साथ मैसूर स्टाइल के योगाभ्यास के साथ हुआ। कमल सिंह ने बताया कि योग का अभ्यास नियमित रूप से किया जाना चाहिए। इसी से योग का लाभ पाया जा सकता है। दो-चार दिन योग करके छोड़ देने वाले कभी भी योग का लाभ नहीं प्राप्त कर सकते। उन्होंने कहा कि अभ्यास से ही कठिन से कठिन आसन सरलता से सिद्ध किए जा सकते हैं।
सुबह सात से 9 बजे तक दूसरे सत्र में उषा देवी ने अयंगर शैली का योगाभ्यास कराया। इस दिन उन्होंने मुख्य रूप से पीछे झुकने वाले आसान कराए जो रीढ़ की हड्डी से जुड़ी परेशानियों में लाभकारी होते हैं। उन्होंने हस्तोत्तान, उष्ट्रासन, धनुरासन आदि का अभ्यास कराया। बताया कि योग करते समय कहीं भी जबर्दस्ती बल प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। सही स्थिति में अभ्यास करते रहने से कठिन आसन भी सहज हो जाएंगे।
सुबह 11 बजे के सत्र में डॉ. लक्ष्मी नारायण जोशी ने ‘नाभि खिसकना’ पहचानने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दोनों हथेलियों को मिलाने पर अंगुलियों का आकार और नाभि से पैरों के अंगूठे तक को किसी धागे से नाप कर उसके छोटे-बड़े होने पर नाड़ी खिसकने का अंदाजा लगा सकते हैं। उन्होंने बताया कि नाभि खिसकने को आधुनिक मेडिकल साइंस वाले खारिज कर देते हैं लेकिन नाभि खिसकने पर व्यक्ति को होने वाली परेशानियों का इलाज वह कभी नहीं कर पाते।
दोपहर के सत्र में बिहार योग विद्यालय मुंगेर से आए स्वामी आत्मस्वरूपानंद जी ने महर्ष पतंजलि द्वारा बताए गए अष्टांग योग पर विस्तार से प्रकाश डाला। बताया कि महर्षि पतंजलि ने जो बताया है उसका पालन करके बहुत ही आसानी से स्वास्थ्य लाभ पाया जा सकता है, अपना नैतिक और आध्यात्मिक विकास किया जा सकता है और मोक्ष भी पाया जा सकता है जो कि योग का लक्ष्य है।
शाम को पुन: सभी गंगा आरती में शामिल हुए। इसके उपरांत सांस्कृतिक कार्यक्रम में इंडियन ओशन बैंड की तरफ से शानदार कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया।
सातवां दिन, 7 मार्च 2025
अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव 2025 का यह अंतिम दिन था। सुबह की शुरूआत हर दिन की भांति गंगा दर्शन और योगाभ्यास के साथ हुई। योगी अजय राणा, उषा देवी ने योगाभ्यास कराए। सभी योग साधकों से उषा देवी ने कहा कि वह नियमित अभ्यास करें और सही तरीके से अभ्यास करने पर ध्यान दें।
सुबह 10 बजे से महोत्सव के समापन कार्यक्रम का आयोजन था। मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज पधारे। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में ऋषि-मुनियों ने कठिन योग साधना से आसन और प्राणायाम के रूप में स्वास्थ्य रक्षण के ऐसे सूत्र तलाशे जो मानव सभ्यता के लिए वरदान साबित हो रहे हैं।
समापन समारोह में बताया गया कि प्रतिदिन यहां 38 विदेशियों समेत 410 प्रतिभागियों ने विभिन्न योगाचार्यों के निर्देशन में योगाभ्यास किया। इस दौरान योगाचार्यों को सम्मानित भी किया गया। इसके उपरांत दोपहर 2 बजे के बाद सभी प्रतिभागी अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की सुनहरी यादों के साथ अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए।

