योगा फॉर वेलनेस एंड ग्लोबल पीस विषय पर अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार

बरेली.20 जून 2025. अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों के क्रम में शुक्रवार को महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय में योगा फॉर वेलनेस एंड ग्लोबल पीस विषय पर अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के तौर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. के पी सिंह की मौजूदगी में इसमें दुनिया के सात देशों के विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हिस्सा लिया।

विदेशी वक्ताओं में फिलोमैथ यूनिवर्सिटी नाइजीरिया से प्रो. गिलिंच जेलिलोव, वीएसबी टेक्निकल यूनिवर्सिटी चेक रिपब्लिक से डॉ.मीनू सिंह, सूमी स्टेट यूनिवर्सिटी यूक्रेन से प्रो. विटालिया कोइबिचुक, वेस्टर्न यूनिवर्सिटी महेंद्र नगर नेपाल से प्रो.हेमराज पंत, वेस्टर्न यूनिवर्सिटी काठमांडू कैंपस नेपाल से प्रो.राजेंद्र बीर चंद, भूटान के गेद्दू कॉलेज से डॉ.लहाटो जांबा और ताइवान की स्कॉलर प्रोफेसर जियाली चेन शामिल हुईं।

इन वक्ताओं ने कहा कि योग ना सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को अच्छा बनाए रखने में भी उपयोगी है। यह एक ऐसा माध्यम है जो पूरी दुनिया को एक सूत्र में बांधने और शांति कायम करने में कारगर हो सकता है। विदेशी वक्ताओं का कहना था कि योग के सूत्र भारत में प्राचीन काल से मिलते हैं और आज यह उनके देश में भी काफी पॉपुलर है। अयंगर योग, हठ योग, अष्टांग योग से पूरी दुनिया लाभान्वित हो रही है।

नेपाल के प्रो.हेमराज पंत ने कहा कि नेपाल और भारत की संस्कृति में काफी समानताएं हैं। योग नेपाल में भी है और इस माध्यम से हम एक-दूसरे को और भी अच्छी तरह से समझ सकते हैं। नेपाल के ही प्रो. राजेंद्र बीर पंत ने कहा कि उनका विश्वविद्यालय एकैडमिक और कल्चरल क्षेत्र में और अधिक रिसर्च के लिए रुहेलखंड विश्वविद्यालय के साथ मिल कर काम करना चाहेगा।

सेमिनार के मुख्य अतिथि और एमजेपीआरयू के कुलपति प्रो.के पी सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि योग हमारे देश की हजारों साल पुरानी परंपरा है। योग भारत की तरफ से पूरी दुनिया को तोहफा है। हमारे ऋषि-मुनियों ने इसे अपने रोजमर्रा के जीवन में अपनाया और लंबा स्वस्थ जीवन जिया। योग ना सिर्फ शारीरिक और मानसिक बीमारियों से निजात दिलाता है बल्कि ग्लोबल पीस में भी इसकी बड़ी भूमिका है।

कुलपति ने अष्टांग योग के यम, नियम, आसन, प्राणायाम, ध्यान आदि की चर्चा करते हुए कहा कि यम का अर्थ इथिक्स से लिया जाता है, नियम से तात्पर्य पर्सनल डिसिप्लीन है। अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह जैसे तत्व भी योग के ही हैं जो दुनिया को शांति, समरसता और विश्वबंधुत्व की सीख देते हैं। कहा कि आज के समय में दुनिया अलग-अलग तरह के विवादों, लड़ाइयों में उलझी हुई है, ऐसे में योग की प्रासंगिकता आज और भी बढ़ जाती है क्योकि योग ही उन्हें शांति की राह दिखा सकता है।

इस सेमिनार में एमजेपीआरयू के योग विभाग की छात्राओं ने योग के विभिन्न आसनों और मुद्राओं का प्रदर्शन भी किया। सेमिनार के समापन पर एमजेपीआरयू के डायरेक्टरेट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशन की एडिनल डायरेक्टर प्रो.तूलिका सक्सेना ने देश-विदेश के सभी अतिथियों और सेमिनार में आए शिक्षकों, विद्यार्थियों के प्रति आभार जताया।

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