Sheetali Pranayam

गर्मियों में लाभदायक है शीतली प्राणायाम, बॉडी हीट को रखेगा कंट्रोल, दिमाग भी रहेगा शांत

गर्मियों में तेज़ धूप और भीषण गर्मी की वजह से पसीना, थकान और चिड़चिड़ापन आम समस्या बन जाती है। ऐसे में योग की शीतलता प्रदान करने वाली विधियाँ आपके लिए विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध हो सकती हैं। शीतली प्राणायाम एक ऐसी ही प्राचीन योग क्रिया है, जो शरीर को ठंडक प्रदान करती है, पित्त दोष को संतुलित करती है और मानसिक शांति देती है। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली में दर्शन शास्त्र/योग के सहायक आचार्य डॉ. सेतवान ने शीतली प्राणायाम और इसके लाभों के बारे में विस्तार से बताया।

क्या है शीतली प्राणायाम?

‘शीतली’ शब्द का अर्थ है — शीतलता देने वाला। यह प्राणायाम शरीर की अतिरिक्त गर्मी को शांत करने के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। हज़ारों वर्षों पूर्व भारतीय ऋषियों ने स्वयं पर प्रयोग करके इस प्राणायाम की उपयोगिता प्रमाणित की और इसे जनकल्याण के लिए प्रस्तुत किया।

प्राचीन ग्रंथों में वर्णन

हठ योग के प्रसिद्ध ग्रंथों हठप्रदीपिका और घेरंड संहिता में शीतली प्राणायाम के बारे में कहा गया है कि यह प्राणायाम शरीर को ठंडक प्रदान करता है तथा शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक ताप को शांत करता है। इसके अभ्यास से शरीर का ताप और जलन दूर होती है।

शीतली प्राणायाम की विधि

1.            सुखासन या पद्मासन में आराम से बैठें।

2.            जीभ को नली के समान गोलाकार बनाकर बाहर निकालें।

3.            मुंह के माध्यम से श्वास धीरे-धीरे अंदर खींचें।

4.            कुछ क्षण श्वास को रोकें (कुंभक)।

5.            नासिका से धीरे-धीरे श्वास छोड़ें।

6.            इस प्रक्रिया को 10–15 बार दोहराएँ।

शीतली प्राणायाम के लाभ

1.शरीर की गर्मी को शांत करता है।

2.उच्च रक्तचाप तथा पेट की अम्ल पित्त (एसिडिटी) को नियंत्रित करने में सहायक होता है।

3.मानसिक तनाव को कम करता है।

4.पित्त दोष और अम्लता में राहत।

5.अजीर्ण, वायुगोला, ज्वर आदि दोषों में लाभदायक।

क्रियाविधि- जब मुख से श्वाँस पूरक करते हैं तो स्लाइवरी ग्लैंड पर वायु का स्पर्श होता है जिसके कारण मुख की लार अधिक मात्रा में बनने लगती है। यह लार आमाशय में जाकर वहां मौजूद अम्लीय भोजन में मिलकर उसे न्यूट्रल करने का कार्य ( लार का गुण क्षारीय तथा आमाशय का गुण अम्लीय होता है) करती है। इससे शरीर को शीतलता मिलती है और आप अच्छा महसूस करते हैं।

शीतली प्राणायाम से जुड़ी सावधानियां

यह प्राणायाम शरीर को ठंडा करता है इसीलिए कफ प्रकृति के व्यक्तियों के लिए उपयुक्त नहीं होता। अस्थमा, दमा, ब्रोंकाइटिस या साइनोसाइटिस से पीड़ित व्यक्ति को इसका अभ्यास किसी योग्य योग शिक्षक की देखरेख में ही करना चाहिए।-डॉ. सेतवान, सहायक योग आचार्य, अनुप्रयुक दर्शन शास्त्र विभाग,महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली।

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