मनोज कुमार
योग बहुत ही व्यापक अर्थों वाला शब्द है. इसका दार्शनिक पक्ष बहुत विशाल है लेकिन हम उस तरफ न जाकर जो अर्थ प्रचलन में व्यवहारिक पक्ष है अर्थात आसन, प्राणायाम और ध्यान की ही बात करें तो यही इतने शक्तिशाली हैं कि मानव मात्र की सभी समस्याओं का समाधान दे सकते हैं। यह बहुत ही आसान तरीके से और बिना किसी आर्थिक बोझ के मनुष्य को शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक और सामाजिक रूप से अर्थात संपूर्ण रूप से स्वस्थ बनाने की शक्ति रखता है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्वास्थ्य की जो परिभाषा दी है उसमें स्पष्ट कहा है कि ‘सिर्फ रोगों का अभाव होना ही स्वास्थ्य नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य पूर्ण शारिरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण की स्थिति है’. शरीर से रोगों को तो दूर होना ही चाहिए, मानसिक रूप से संतुलित होने और तनाव संभालने की क्षमता, सोचने समझने की स्वस्थ स्थिति और समाज, परिवार, आसपास के लोगों के साथ सामंजस्यपूर्ण सकारात्मक संबंध रखने की क्षमता का होना एक स्वस्थ व्यक्ति की निशानी है.
आसन शरीर को मजबूती देता है, मांस-पेशियों, मर्म बिंदुओं पर सीधा प्रभाव
योग से आप शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य बहुत ही आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। आसनों जैसे ताड़ासन, त्रिकोणासन, वीरासन, सूर्य नमस्कार आदि से शरीर की मांस-पेशियों में जरूरी खिंचाव उत्पन्न होता है जो थकान दूर करने के साथ ही मांस-पेशियों को मजबूत और शक्तिशाली बनाता है. भुजंगासन, चक्रासन, अर्ध मत्स्येंद्र आसन, मर्कटासन, पवन मुक्तासन आदि शरीर के विभिन्न मर्म बिंदुओं की मालिश कर देते हैं और शरीर के विभिन्न अंगों के दर्द स्वत: दूर हो जाते हैं। आसन जठराग्नि को तेज करके पाचन तंत्र को ठीक कर देते हैं और पाचन शक्ति ठीक हो गई तो ढेरों समस्याएं तो स्वत: खत्म हो जाती हैं। पाचन तंत्र को ठीक रखने और सभी रोगों का कारण समझे जाने वाले वात,पित्त कफ जैसे त्रिदोषों को दूर करने के लिए हठ योग की पुस्तकों में षटकर्म या छह विशेष क्रियाएं भी बताई गई हैं। धौति, बस्ति, नेति, नौलि, त्राटक और कपालभाति षटकर्मों से हम अपने शरीर की अशुद्धियों को दूर कर सकते हैं. पाचन और उत्सर्जन तंत्र को ठीक रखने में इनके लाभ अद्भुत हैं.
मानसिक स्वास्थ्य के बेहतर बनाते हैं प्राणायाम और ध्यान
इसी प्रकार प्राणायाम और ध्यान के फायदे भी गजब हैं। मानसिक शांति, अनिद्रा, तनाव दूर करने, मानसिक रोगों के समाधान में प्राणायाम और ध्यान आश्चर्यजनक रूप से फायदेमंद है। जो लोग कहते हैं कि योग का लाभ कई महीनों या वर्षों के अभ्यास के बाद पता चलता है तो उनके लिए कहूंगा कि किसी विद्वान योगाचार्य से भ्रस्त्रिका और भ्रामरी प्राणायाम की विधि सीख कर वे इसे करें और इसके फायदों को वह तत्काल महसूस कर सकते हैं.

वैज्ञानिक शोध से प्रमाणित हो रही योग की महत्ता
बिहार स्कूल ऑफ योगा मुंगेर, पतंजलि योगपीठ, आर्ट ऑफ लिविंग, ईशा फाउंडेशन जैसे योग के बड़े संस्थानों में योग के प्रभाव को लेकर तमाम शोध हो चुके हैं और लगातार हो रहे हैं। इन संस्थानों के विद्वानों की मानें तो आसन और प्राणायाम का सीधा प्रभाव हमारे शरीर के बाहरी अंगों ही नहीं बल्कि आंतरिक क्रियाओं, हमारे हार्मोन सिस्टम और नर्वस सिस्टम पर भी होता है। योगासन, प्राणायाम और ध्यान हमारे नर्वस सिस्टम को शांत करते हैं और हार्मोन स्राव को नियमित करते हैं। तनाव देने वाले हार्मोन कार्टिसोल में कमी और खुशी देने वाले डोपामिन में बढ़ोतरी को तो आप योग करते समय ही महसूस कर सकते हैं.
सुगठित शरीर, त्वचा में चमक, चेहरे पर ओज, मोटापे में कमी, शरीर का ऊर्जावान रहना जैसे लाभ तो आप योगाभ्यास के कुछ सप्ताह के अभ्यास से ही महसूस कर सकते हैं। योग की शक्ति को समझने के लिए मैं एक 65 वर्षीय सरकारी सेवा से रिटायर्ड अधिकारी का अनुभव बताना चाहूंगा. नौकरी में रहते हुए ही उन्हें कई शारीरिक रोगों ने गिरफ्त में ले लिया था।
योग ने ठीक कर दिया शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य
रिटायरमेंट के बाद जब फिजिकल मूवमेंट में कमी आई तो अस्थमा, पाचन तंत्र की गड़बड़ी, कब्ज, ऊर्जाहीनता जैसी स्थिति गंभीर होने लगी. किसी भी काम में मन नहीं लगना, दिलचस्पी न होना, चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं भी बढ़ती गईं. बातचीत में उन्होंने साफ-साफ कहा कि ‘जीवन दवाओं पर चल रहा था, मन में दुर्बलता आ गई थी, निराश हो गया था और अवसाद की स्थिति बन गई थी. शरीर इतना कमजोर महसूस होता था कि 500 मीटर चलना भी मुश्किल लगता था’. फिर किसी तरह उन्होंने 14 दिन का एक फ्री ऑनलाइन योग कार्यक्रम जॉइन किया. यहीं से उनके जीवन में बदलाव की शुरूआत हो गई.
उस 14 दिन के योगासन के बाद ही उन्हें अपने जीवन में बदलाव स्पष्ट महसूस होने लगे और उन्होंने योग को अपने जीवन में शामिल कर लिया। पिछले करीब एक वर्ष से उनकी योग यात्रा जारी है। अब वह कहते हैं कि ‘दवाओं का जो खर्च 10 हजार रुपए प्रतिमाह का था वह दो हजार रुपए से भी कम का हो गया है। शरीर में जितने भी रोग थे उनमें से बहुत से तो खत्म हो गए और जो बचे हैं उनमें 60 से 70 प्रतिशत तक आराम है। अस्थमा जैसी गंभीर परेशानी के लिए वर्षों से चल रही दवाएं बंद हो गईं. शरीर ऊर्जावान हो गया है और जीवन प्रत्याशा बढ़ गई है. चार-पांच किलोमीटर पैदल चलना अब आम बात है और बाइक-साइकल से मार्केट भी हो आते हैं’।
इन रिटायर्ड अधिकारी की बदली स्थिति से प्रभावित से होकर उनके कई हमउम्र साथियों ने भी योग करना शुरू कर दिया है. अधिकारी महोदय ने बताया कि उनके साथियों का समूह नियमित योग, प्राणायाम और ध्यान कर रहा है। इससे सभी का सामाजिक दायरा बढ़ रहा है. दिन की शुरूआत अच्छी हो रही है, जीवन का अकेलापन दूर हो गया है और समाज के लिए कुछ करने की भावना प्रबल हो गई है। अब सभी मिलकर विभिन्न समाजकार्यों में भी हिस्सा लेते हैं.
इस प्रकार हम देखें तो संपूर्ण स्वास्थ्य की प्राप्ति में योग का कोई विकल्प नहीं. हमने पिछले महीने 21 जूनको 12वां योग दिवस मनाया। आपमें से बहुत से लोग इसमें शामिल भी रहे होंगे. ऐसे में यही कहना है कि योग को सिर्फ कुछ दिनों के लिए ही सीमित मत रखिए. ऊर्जावान और स्वस्थ जीवन के लिए इसे अपनी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बनाइए, इतने लाभ मिलेंगे कि आप खुद ही हैरान रह जाएंगे.

